क्या आपने कभी गौर किया है कि विमानयात्रा के दौरान जो कुछ संसाधन आप अपने साथ नहीं ले जा सकते उसमें परम्परागत थर्मोमीटर भी शामिल है. अब एक थर्मोमीटर से क्या नुकसान हो सकता है?
परम्परागत थर्मोमीटर में पारा होता है जो कि जहरीला होता है. इसलिए सामान्य रूप से यह बात समझ में आती है कि थर्मोमीटर को लेकर हवाई यात्रा करने वाले यात्री से परेशानी उत्पन्न हो सकती है. परंतु बात मात्र इतनी सी ही नहीं है.
थर्मोमीटर मे मौजूद पारा स्वयं विमान के लिए घातक सिद्ध हो सकता है. विमान की बॉडी टाइटेनियम और एल्यूमीनियम से बनी होती है. एल्यूमीनियम एक ऐसी धातु है जो ऑक्सिजन के साथ तुरंत सम्पर्क कायम कर रसायनिक प्रक्रिया शुरू कर देती है. इससे हवा में मौजूद ऑक्सिजन एल्यूमीनियम की सतह को नुकसान पहुँचा सकता है.
सामान्यत: ऐसा हो नहीं पाता क्योंकि जैसे ही ऐसी कोई प्रतिक्रिया शुरू होती है एल्यूमीनियम की परत के ऊपर ओक्साइड की पतली परत जम जाती है और इससे एल्यूमीनियम की परत को नुकसान नहीं पहुँचता. परंतु पारा यहाँ खलनायक बन सकता है.
पारे का एक गुणधर्म ओक्साइड पर हमला करना भी है. यदि पारा ओक्साइड की परत के सम्पर्क में आए तो उसे नुकसान पहुँचा सकता है. दूसरी तरफ पारा एक जगह टिकता भी नहीं इसलिए व्यापक नुकसान की सम्भावना उत्पन्न हो जाती है. इसके बाद ऑक्सिजन एल्यूमीनियम की परत को भी नुकसान पहुँचाना शुरू कर देता है. इससे विमान की बॉडी को भारी नुकसान हो सकता है.
एक और बात - इस तरह की रसायनिक प्रक्रिया से उत्पन्न गर्मी से विमान के फ्यूल टैंक में धमाका भी हो सकता है.
COPY BY TARAKASH
परम्परागत थर्मोमीटर में पारा होता है जो कि जहरीला होता है. इसलिए सामान्य रूप से यह बात समझ में आती है कि थर्मोमीटर को लेकर हवाई यात्रा करने वाले यात्री से परेशानी उत्पन्न हो सकती है. परंतु बात मात्र इतनी सी ही नहीं है.
थर्मोमीटर मे मौजूद पारा स्वयं विमान के लिए घातक सिद्ध हो सकता है. विमान की बॉडी टाइटेनियम और एल्यूमीनियम से बनी होती है. एल्यूमीनियम एक ऐसी धातु है जो ऑक्सिजन के साथ तुरंत सम्पर्क कायम कर रसायनिक प्रक्रिया शुरू कर देती है. इससे हवा में मौजूद ऑक्सिजन एल्यूमीनियम की सतह को नुकसान पहुँचा सकता है.
सामान्यत: ऐसा हो नहीं पाता क्योंकि जैसे ही ऐसी कोई प्रतिक्रिया शुरू होती है एल्यूमीनियम की परत के ऊपर ओक्साइड की पतली परत जम जाती है और इससे एल्यूमीनियम की परत को नुकसान नहीं पहुँचता. परंतु पारा यहाँ खलनायक बन सकता है.
पारे का एक गुणधर्म ओक्साइड पर हमला करना भी है. यदि पारा ओक्साइड की परत के सम्पर्क में आए तो उसे नुकसान पहुँचा सकता है. दूसरी तरफ पारा एक जगह टिकता भी नहीं इसलिए व्यापक नुकसान की सम्भावना उत्पन्न हो जाती है. इसके बाद ऑक्सिजन एल्यूमीनियम की परत को भी नुकसान पहुँचाना शुरू कर देता है. इससे विमान की बॉडी को भारी नुकसान हो सकता है.
एक और बात - इस तरह की रसायनिक प्रक्रिया से उत्पन्न गर्मी से विमान के फ्यूल टैंक में धमाका भी हो सकता है.
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